गृह मंत्रालय द्वारा ‘राष्ट्रीय प्रवासी सूचना प्रणाली’ का शुभारंभ

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गृह मंत्रालय (MHA) ने हाल ही में प्रवासियों पर नज़र रखने के लिए मौजूदा NDMA-GIS प्रणाली के आधार पर राष्ट्रीय प्रवासी सूचना प्रणाली (NMIS) शुरू की है. एक प्रमुख गतिविधि के तौर पर, ‘श्रमिक’ ट्रेनों और बसों के माध्यम से यात्रा करने वाले देश भर में फंसे प्रवासियों की आवाजाही को कारगर बनाने के लिए, गृह मंत्रालय (MHA) ने शनिवार को राष्ट्रीय प्रवासी सूचना प्रणाली (NMIS) की शुरुआत की – जो कि मौजूदा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के  जियोग्राफिक इन्फोर्मेशन सिस्टम (GIS) पोर्टल पर आधारित है.

यह पोर्टल एक राज्य से दूसरे राज्य की यात्रा करने वाले प्रवासियों का एक केंद्रीय कोष और संपर्क साधने में सहायता करेगा. अब तक 1074 श्रमिक विशेष गाड़ियों को संचालित किया गया है जिनसे 14 लाख से अधिक श्रमिक अपने गंतव्य स्थान तक पहुंचे हैं. 

राष्ट्रीय प्रवासी सूचना प्रणाली (NMIS) की विशेषताएं

• राज्य अपने डाटा के साथ प्रत्येक प्रवासी की बैच फ़ाइलों जैसेकि नाम, आयु, मोबाइल नंबर, उत्पत्ति और गंतव्य, यात्रा की तारीख – को अपलोड कर सकते हैं. यह वह डाटा है जो पहले से ही राज्यों द्वारा एकत्र किया गया है.

• राज्य GIS के माध्यम से अब यह अनुमान लगा सकते हैं कि कितने प्रवासियों ने उनके राज्य को छोड़ दिया है और अपने गंतव्य तक पहुंच गए हैं.

• प्रत्येक प्रवासी के लिए एक यूनिक आईडी निर्मित की जाएगी, जो उनसे संपर्क साधने के साथ ही अन्य सभी महत्त्वपूर्ण कार्यों के लिए उपयोग की जा सकती है.

• इस पोर्टल के माध्यम से केंद्र सरकार के प्रमुख मंत्रालय भी प्रवासियों की आवाजाही की निगरानी कर सकते हैं.

श्रमिक एक्सप्रेस और प्रवासी

इस साल 01 मई को, गृह मंत्रालय ने पूरे भारत में फंसे प्रवासियों, तीर्थयात्रियों, पर्यटकों, छात्रों और अन्य व्यक्तियों की आवाजाही के लिए रेल मंत्रालय द्वारा संचालित ‘श्रमिक ट्रेन’ नामक विशेष ट्रेनों के माध्यम से अनुमति दी थी. गुरुवार को, केंद्र ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निजी बसों को किराए पर लेने की अनुमति दी, ताकि विशेष ‘श्रमिक’ ट्रेनों से यात्रा करने के लिए श्रमिकों को रेलवे स्टेशनों तक पहुंचाया जा सके. केंद्र ने इस बात का भी दावा किया है कि, इस किराया लागत का 85% केंद्र सरकार द्वारा वहन किया गया, जबकि 15% राज्य सरकारों द्वारा वहन किया गया था.

फंसे हुए प्रवासियों का मुद्दा

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 28 मार्च को तालाबंदी (लॉकडाउन) के पहले चरण की घोषणा करने के बाद, हजारों प्रवासी श्रमिकों को लॉकडाउन का उल्लंघन करके और स्वास्थ्य को खतरा पैदा करने की आशंका के मद्देनजर अपने घरों तक पहुंचने के लिए दिल्ली-उत्तर प्रदेश सीमा पर स्थित दिल्ली के आनंद विहार अंतरराज्यीय बस टर्मिनल पर जमा होते हुए देखा गया था.

इसी तरह, प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 14 अप्रैल को लॉकडाउन 03 मई तक बढ़ाने की घोषणा करने के बाद, गत 14 अप्रैल को बांद्रा स्टेशन पर उत्तरप्रदेश, बंगाल और बिहार के लिए जनसाधारण एक्सप्रेस ट्रेनों में सवार होने के भ्रम के तहत लगभग 2,000 प्रवासी श्रमिक इक्ट्ठे हो गए. इसके अलावा, ऐसे कई मामले भी देखे गये हैं जहां लॉकडाउन के कारण आमदनी के साधन समाप्त होने की वजह से देश के विभिन्न राज्यों की सीमाओं पर हजारों प्रवासी अपने घरों तक पहुंचने के लिए एकत्रित हो गये. प्रवासी श्रमिकों के संबंध में तीन उल्लेखनीय दुर्घटनाएं भी हुई हैं, जिसमें 82 पैदल चल रहे प्रवासियों की मौत हो गई है.



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